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Friday, May 7, 2021
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Kanpur Metro की इस पहल से बचेगा हजारों लीटर पानी, ग्रे और ब्लैक वॉटर के लिए किया ये काम


कानपुर: Kanpur Metro अब आपका सफर आसान तो करेगी ही, साथ ही Water Conservation के लिए भी कारगर साबित होगी. दरअसल, मेट्रो प्रबंधन हमेशा से ही पानी बचाने पर जोर दे रही है. एक तरफ जहां मेट्रो प्रशासन ने वॉटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था की है, तो वहीं पानी बचाने के लिए अलग-अलग उपाय निकाले जा रहे हैं. ऐसे में एक बार इस्तेमाल किया गया पानी दोबारा इस्तेमाल हो सके, इसके लिए प्लांट लगाए जा रहे हैं. 

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150 लीटर पानी में होती है एक ट्रेन की सफाई
जानकारी के मुताबिक, मेट्रो ट्रेन की सफाई के लिए ऑटोमेटिक वॉशिंग प्लांट बनाए गए हैं, जिसमें मात्र 150 लीटर पानी में ही ट्रेन की सफाई हो जाएगी. इसके बाद सफाई में इस्तेमाल किया गया पानी फिर से रिसाइकिल किया जाएगा. बताया जा रहा है कि गीतानगर डिपो इस्तेमाल किए गए पानी की हर एक बूंद रिसाइकिल की जाएगी. एक बूंद पानी भी डिस्चार्ज नहीं किया जाएगा. वहीं पर सारे पानी का उपयोग किया जाएगा. 

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गंदे पानी को साफ करने के लिए लगेंगे 2 प्लांट
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गीतानगर डिपो जीरो वॉटर डिस्चार्ज पर काम करेगा. वेस्ट वॉटर की एक भी बूंद यहां निस्तारित नहीं की जाएगी. पानी को रीसाइकल कर बाकी कामों में लाया जाएगा. साफ और रिसाइकिल्ड पानी के लिए पाइप लाइन भी अलग होगी.

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5 फेज में ऐसे होती है सफाई
आपको बता दें, मेट्रो की सफाई मुख्य तौर पर पांच फेज में की जाती है. पहला चरण छिड़काव का होता है, जहां ट्रेन पर पानी छिड़का जाता है. ताकि ऊपरी सतह की गंदगी साफ हो जाए और ट्रेन का टेंपरेचर भी कम हो जाए. 
दूसरे चरण में ट्रेन पर डिटर्जेंट स्प्रे किया जाता है.
तीसरे फेज में सरफेस को ब्रश से रगड़ा जाता है और पानी डाला जाता है. 
इसके बाद एक बार फिर पानी से ट्रेन धोई जाती है, ताकि कोई दाग न बे. 
आखिर में, ब्लोअर की हवा से पानी को सुखाया जाता है. इसके बाद ट्रेन को यार्ड में खड़ा कर दिया जाता है.

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ग्रे और ब्लैक वॉटर के लिए प्लांट भी अलग
डिपो में दो प्लांट्स लगेंगे-

1. किचन, बाथरूम और फ्लोर की सफाई वाले पानी (ग्रे वॉटर ) के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगेगा
2. ऑटोमैटिक वॉश प्लांट में ट्रेनों की सफाई वाले केमिकल वाले पानी को ब्लैक वॉटर कहा जाता है. इसके लिए एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) लगाया जाएगा.

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