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Tuesday, May 4, 2021
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Exclusive Interview: दमोह में जीत से गदगद कमलनाथ बोले-जनता ने देश को दिया ‘भाजपा भगाओ का संदेश’


भोपाल: दमोह में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अजय टंडन ने भाजपा के राहुल लोधी को 17 हजार से ज्यादा वोटों से हरा दिया. वहीं, पांच अन्य राज्यों में हुए चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर ZEE मध्य प्रदेश के संपादक दिलीप तिवारी ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कमलनाथ से प्रदेश की राजनीति और राष्ट्रीय राजनीति को लेकर कई सवाल किए. 

सवाल: कमलनाथ जी दमोह में जीत की उपलब्धि आपके खाते में जाएगी या राहुल गांधी या फिर प्रियंका गांधी के?

जवाब: ये जनता की जीत है, इसलिए यह जीत जनता के खाते में जाएगी. दमोह की जनता ने पूरे देश की जनता को एक संदेश दिया है. यहां की जनता ने बीजेपी को सबक सिखाया है. इसलिए हम जनता को बधाई देते हैं. 

सवाल: कमलनाथ जी पूरी सरकार के लगने के बाद भी भाजपा यहां की सीट हार गई. हार के बाद जयंत मलैया ने भितरघात की राजनीति का आरोप लगाया है. आप इस बारे में क्या कहेंगे?

जवाब: देखिए भाजपा को यहां की जनता ने 15 वर्षों का हिसाब दिया है. यहां पर पूरी सरकार लगी हुई थी. फिर भी जनता ने कांग्रेस के पक्ष में वोट दिया है. इसलिए मैं भीतरघात की राजनीति को नहीं मानता है. 

सवाल: कमलनाथ जी, वोटिंग से एक दिन पहले यहां पर एक मंत्री की गाड़ी से नोट बरामद होने की बात आपने कही थी. इस पर आपने कहा था कि ये गलत हो रहा है. यह नहीं  होना चाहिए. बावजूद यहां आपकी जीत हुई है. एक तरफ बंगाल में ममता, दूसरी तरफ आप. कहीं ये सिमिलरिटी तो नहीं है….संजय गांधी के सिपहसलार

जवाब: देखिए ये किसी प्रकार की सिमिलरिटी नहीं है. मैं दमोह की जनता  को धन्यवाद देना चाहता हूं. जिस दिन नोटों से भरी कार पकड़ाई थी. आप उस दिन मेरे साथ थे. लेकिन वहां मौजूद पुलिस गाड़ी को भगा ले गई. मंत्रियों का दबाव होने की वजह से पुलिस ने कांग्रेस का साथ नहीं दिया. बावजूद इसके जनता ने कांग्रेस को जिताया. जनता सच जानती थी, इसलिए जनता ने सच का साथ दिया. मैं प्रदेश की जनता को दमोह की जनता से सीखने की भी अपील करता हूं.

सवाल: जिस युवा कांग्रेस नेत्री (ममता बनर्जी) को आप पार्टी में लाए थे. हालांकि बाद में वे भले ही पार्टी छोड़कर चलीं गईं. उनको हराने के लिए भाजपा के बड़े-बड़े दिग्गज वहां चुनाव प्रचार करने गए. लेकिन ममता ने एक पैर से फुटबॉल खेल कर सबको हरा दिया. खुश तो आप बहुत होंगे?

जवाब: देखिए ममता की जीत से मैं तो बहुत खुश हूं. मेरे उनसे बहुत पुराने संबंध हैं. जीत के बाद मैंने उन्हें बधाई भी दी. इस दौरान हम लोगों ने पुराने दिनों को याद किया. शपथ ग्रहण के बाद मैंने, ममता बनर्जी को यहां आमंत्रित भी किया है. साथ ही मैंने उनसे यहां आकर भाजपा की पोल खोलने का भी आग्रह किया है. पूरी भाजपा की टीम उनको इनकम टैक्स और ईडी के दम पर डराने की कोशिश कर रही थी. बावजूद पार्टी की एक न चली. अमित शाह जो हर रैली में 200+ की बात करते थे. बावजूद पार्टी 80 से ज्यादा सीटों पर जीत नहीं दर्ज कर पाई. बंगाल में खेला शुरू हो गया है. अब पूरे देश में खेला शुरू होगा. असल बात तो यह है कि जिन पांच राज्यों में चुनाव हुए. सभी को मिलाकर 822 सीटें थी, लेकिन भाजपा को सिर्फ 140 सीटें ही मिली.

सवाल: PM मोदी के बारे में आपका क्या कहना है?

जवाब: देखिए प्रधानमंत्री पद का हम सम्मान करते हैं, चाहे वो किसी भी पार्टी का हो. लेकिन प्रधानमंत्री ने जिस तरह के घिनौने भाषण दिए हैं, विश्व में किसी भी प्रधानमंत्री ने अब तक नहीं दिया है. इसी को बंगाल की जनता ने स्वीकार नहीं किया. यही कारण है कि धनबल और बाहुबल के बावजूद भी पार्टी की हार हुई. 

सवाल: एक मई को ममता गईं, लेकिन वो फिर आ गईं. इतने बड़े-बड़े नेताओं के प्रचार के बावजूद भी ममता जीत गईं. आने वाले समय में कांग्रेस का भले ही कई राज्यों से सफाया हो जाए, लेकिन अगर क्षेत्रीय पार्टियां मजबूत हैं, तो क्या भाजपा की चिंता इससे बढ़ेगी?

जवाब: देखिए दीदी ने एक पैर से गोल किया, व्हील चेयर से गोल किया है. इसलिए हमें अपने देश के मतदाताओं को ये नहीं मानना चाहिए कि वे अनाड़ी हैं. 1977 में इसी जनता ने इंदिरा गांधी और संजय गांधी को हराया था और सरकार गिराई थी. 1984 में भाजपा के पास सिर्फ 2 सीटें थी. एक समय था, जब भाजपा से लोग प्रेम करते थे. उसकी वजह अटल बिहारी वाजपेयी जी थे. लेकिन मोदी से लोग डरते हैं, मोदी को प्यार नहीं करते हैं. अब तो जनता और जागरूक हो गई है. इसके पीछे इंटरनेट की क्रांति है. आज 75 प्रतिशत लोग इंटरनेट यूज करते हैं. हमारे जो नौजवान हैं, पहले आप उनको ज्ञान देते थे. लेकिन आज वो खुद आपको ज्ञान देंगे. 

सवाल: कमलनाथ जी केरल और बंगाल में आपका बंटाधार हो गया. ये कांग्रेस के साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है?

जवाब: देखिए बंगाल में हमारी लड़ाई ममता से नहीं थी. हमारी लड़ाई भाजपा से थी. हमारा मकसद देश को भाजपा मुक्त करना है. इसलिए हमने केरल में वापपंथी पार्टियों के साथ समझौता किया. केरल में क्या भाजपा की एक भी सीट आई? ये भी तो आप बोलिए. बंगाल और केरल में भाजपा विरोधी पार्टी आ गईं. वहीं, पुदुचेरी में ये गठबंधन से जीते. असम में ये कैसे जीते, कैसे नहीं जीते..ये तो आने वाला समय ही बताएगा. और मेरा ये भी कहना है कि ईवीएम को पूरी तरह से बैन किया जाए. क्योंकि ईवीएम में बहुत गड़बड़ी होती है. 

सवाल: कमलनाथ जहां पर आप की जीत होती है, वहां पर ईवीएम ठीक होती है और जहां पर आप हार जाते हैं, वहां ईवीएम पर दोष मढ़ते हैं?

जवाब: देखिए इनकी रणनीति को जरूर ध्यान देना चाहिए. लोकसभा चुनाव से पहले ये पोल खुलवाना नहीं चाहते हैं. अगर केरल में ये दो सीट जीत जाते तो लोग सवाल करते. फिर इनको जवाब देना पड़ता. इसलिए मैं कहता हूं ईवीएम को बैन करना चाहिए, क्योंकि जितने भी विकसित देश हैं वहां पर ईवीएम से मतदान नहीं होता.

सवाल: कमलनाथ जी दमोह में धनबल, बाहुबल और पूरी सरकार के प्रयास के बावजूद पार्टी वहां हार गई. दमोह की जीत को क्या मैं आगे लिए इशारा मान लूं कि भाजपा की हार होगी?

जवाब: देखिए ये इशारा ही है. आज प्रदेश और देश की जनता परेशान है. और अब यह जनता भाजपा को तमाचा मारेगी.  

सवाल: आप कहते हैं कि मैं खरीद-फरोख्त की राजनीति नहीं करूंगा. अगर महाराज को जाना है तो जाएं. ऐसे में सवाल उठ रहे थे कि आप मध्य प्रदेश की राजनीति छोड़कर भाग जाएंगे. लेकिन आप को देख के लगता है कि आप यहीं रहेंगे?

जवाब: देखिए मैं, मध्य प्रदेश को छोड़कर नहीं जाने वाला हूं. मेरा दिल, दिमाग मध्य प्रदेश में बसा है. 

सवाल: आरोप लगते हैं कि आप सीईओ स्टाइल में काम करते हैं. आपके कई पुराने साथी आप से खुश नहीं रहते हैं. विरोधी तो नाखुश रहते ही हैं. साथ ही कहा जाता है कि आप संजय गांधी की तरह काम नहीं करते हैं. कहा जाता है कि आप पैसा न खर्च करें तो कांग्रेस तबाह हो जाएगी?

जवाब: देखिए मेरे पास 24 घंटे हैं. इसलिए मैं 24 घंटे को चूस लेना चाहता हूं. अगर कोई मुझे कहता है कि आप मेरे साथ 1 घंटे बैठ लीजिए तो मैं नहीं बैठता. आखिर मैं क्यों बैठू? आज का दौरान ई-मेल और whatsapp का है. मेरे पास कई लोगों का मैसेज आता रहता है. उन्हें जवाब देना होता है. मैं सबके साथ हूं और हमें कांग्रेस के बारे में सोचना है. 

सवाल: देखिए महाराज छोड़कर चले गए. अब दिग्गी राजा यानि कि दिग्विजय ही बचे हैं. कहा जाता है कि आप संजय गांधी के बहुत खास हैं. क्या इस जीत के बाद आपकी प्रियंका गांधी, राहुल गांधी या फिर सोनिया गांधी से बात हुई?

जवाब: मेरी प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी से हुई है. मेरा कोई उद्योग नहीं है. आप पता नहीं कहां से मेरे ऊपर उद्योगपति का टैग लगा देते हैं. मैं एक बात जरूर कह सकता हूं. मेरे राजनीतिक करियर पर कोई सवाल नहीं उठा सकता है. मैं तो भाजपा से खुद सवाल पूछना चाहता हूं कि आखिर पांच राज्यों में उन्होंने इतना खर्च किया, वो पैसा कहां से मिला. क्या भाजपा के नेताओं ने बीबी का जेवर बेचकर पैसा लाया था. भाजपा 6 हजार करोड़ बंगाल में लगाए और 20 करोड़ दमोह में लगाया. ये पैसा कहां से आया. 

सवाल: आपके जो साथी छोड़कर भाजपा में उनका रेट कार्ड क्या था?

जवाब: देखिए विधायकों ने मुझे खुद कहा कि मुझे 25-25 करोड़ रुपए दिए. 

सवाल: आपने महाराज को बहुत जमीन दी. वर्तमान सरकार भी उसकी लीज बढ़ा रही है. इसके अलावा भी आपने महाराज को बहुत कुछ दिया. बावजूद महाराज खुश नहीं थे. आखिर उन्हें चाहिए क्या? मुख्यमंत्री का पद या फिर केंद्र में मंत्री?

जवाब: देखिए मैं नहीं जानता हूं कि उन्हें क्या चाहिए? उनसे अब मेरा वास्ता खत्म हो चुका है. 

सवाल: दमोह उपचुनाव के बाद क्या आपके मुख्यमंत्री बनने की उम्मीदें फिर जिंदा हो गईं हैं? 

जवाब: देखिए मुझे तो उम्मीद नहीं है, लेकिन मैं अपने राजनीतिक करियर को खत्म करने से पहले ऐसा कुछ करूंगा कि प्रदेश का नाम पूरे देश और विश्व में रोशन होगा. मैं पार्टी के लिए काम करूंगा. हां हमारा संगठन अभी भाजपा से कमजोर है, लेकिन हम अपनी बात जनता तक पहुंचाकर भाजपा को जरूर हराएंगे. 

कमलनाथ के इंटरव्यू का पूरा वीडियो यहां देखें-

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