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Friday, May 7, 2021
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DNA ANALYSIS: क्या Corona Vaccine को ‘पेटेंट मुक्त’ करने से खत्म हो जाएगा संकट?


नई दिल्ली: भारत में कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) की कमी का संकट कैसे समाप्त हो सकता है? इस वक्त चारों तरफ एक ही सवाल चर्चा में है और वो ये कि वैक्सीन नहीं है, और ये इसलिए नहीं है क्योंकि इसका उत्पादन करने वाली कंपनियां सिर्फ दो ही हैं. यानी दो कंपनियों को 135 करोड़ लोगों के लिए वैक्सीन की 270 करोड़ डोज उपलब्ध करानी है. ये काम बहुत मुश्किल है और यही वजह है कि अब तक कई राज्यों में 18 साल से 44 साल तक की उम्र के लोगों को वैक्सीन लगनी शुरू नहीं हुई है. जिन राज्यों में ऐसा हो भी रहा है, वहां टीकाकरण अभियान काफी  सीमित है.

उदाहरण के लिए आप देश की राजधानी दिल्ली की स्थिति को समझिए. दिल्ली में 18 साल से ऊपर के 90 लाख लोगों को वैक्सीन की दो डोज लगनी हैं, यानी कुल 1 करोड़ 80 लाख डोज चाहिए. लेकिन दिल्ली सरकार के पास इतनी डोज है ही नहीं. इसी का नतीजा है कि दिल्ली में आज से 18 साल से ऊपर के लोगों को वैक्सीन लगनी तो शुरू हो गई, लेकिन कुल वैक्सीनेशन सेंटर्स की संख्या सिर्फ 77 ही रखी गई है. जबकि वैक्सीन लगानी है 90 लाख लोगों को. आप कह सकते हैं कि ये एक लॉटरी की तरह है। पंक्ति में तो कई सारे लोग खड़े हैं लेकिन भाग्यशाली वही है, जिसे वैक्सीन के लिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट मिल गया है.

डर बढ़ा रही वैक्सीन की धीमी रफ्तार

यही स्थिति दूसरे राज्यों की भी, और प्राइवेट अस्पतालों में हर रोज 200 से 500 लोगों को ही डोज लगाई जा रही हैं. अब अगर वैक्सीनेशन इसी स्पीड से चला तो इस साल के अंत तक देश की 30 प्रतिशत आबादी को भी वैक्सीन नहीं लग पाएगी. इसलिए अब हम कुछ ऐसी बातें आपको बताएंगे, जिन पर अमल करके इस संकट को समाप्त किया जा सकता है. ये सब हम आपको बहुत सरल भाषा में बताएंगे और हम चाहते हैं कि आप इसे सोशल मीडिया पर भी ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें.

वैक्सीन की कमी का संकट क्यों खड़ा हुआ?

इस संकट की दो प्रमुख वजह हैं, पहली है देश की आबादी, जो 135 करोड़ है, और दूसरी वजह है वैक्सीन का सीमित उत्पादन. इस समय भारत में दो वैक्सीन का उत्पादन हो रहा है. पहली है कोविशील्ड (Covishield), जिसका निर्माण सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) कर रहा है. जबकि दूसरी है कोवैक्सीन (Co-Vaxin), जिसे हैदाराबाद की भारत बायोटेक (Bharat Biotech) कंपनी बना रही है. आपको फिर से बता दें कि सिर्फ दो कम्पनियां भारत में वैक्सीन बना रही हैं. जबकि हजारों कंपनियां इस काम में जुट सकती हैं. वो कैसे, अब आप इसे कुछ आंकड़ों से समझिए.

3 हजार में से सिर्फ 2 कंपनियां बना रहीं वैक्सीन

भारत में कुल 3 हजार फार्मास्युटिकल कंपनियां हैं, जिनकी देशभर में साढ़े 10 हजार मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हैं. इन सभी कंपनियों की कुल वैल्यू 2 लाख 19 हजार करोड़ रुपये है. सरल शब्दों में कहें तो हमारे देश में 3 हजार कंपनियां अपनी साढ़े 10 हजार मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में वैक्सीन का निर्माण कर सकती हैं. लेकिन अभी सिर्फ दो ही कर रही हैं और बाकी की 2 हजार 998 कंपनियां वैक्सीन के उत्पादन में देश की कोई मदद नहीं कर पा रही हैं.

वैक्सीन को पेटेंट मुक्त करना होगा

अब अगर इनमें से एक हजार कंपनियां भी वैक्सीन का उत्पादन करती हैं तो देश में वैक्सीन की कमी होगी ही नहीं. लेकिन आप सोच रहे होंगे कि ये आखिर होगा कैसे? तो इसके लिए वैक्सीन को पेटेंट मुक्त करना होगा. यानी वैक्सीन बनाने का फॉर्मूला क्या है, ये उसे विकसित करने वाली कंपनी, दूसरी कंपनियों के साथ शेयर करे, और केंद्र सरकार इन कंपनियों को वैक्सीन बनाने का अधिकार दे. 

सरकार ऐसा कैसे कर सकती है?

द पेटेंट एक्ट, 1970 के सेक्शन 92 में लिखा है कि सरकार 3 परिस्थितियों में किसी भी वस्तु, उपकरण और दवाइयों को पेटेंट मुक्त कर सकती है. 
1. अगर देश गम्भीर आपातकाल से गुजर रहा है.
2. अगर कोई वस्तु, उपकरण या वैक्सीन इतनी जरूरी है कि इसकी कमी से किसी की जान को खतरा है.
3. अगर ये लोगों के हित में है.
यानी मौजूदा हालात इन तीनों शर्तों को पूरा करते हैं. भारत में औसतन हर दिन कोरोना वायरस से तीन हजार लोगों की मौत हो रही है. यानी वैक्सीन की सख्त जरूरत इस समय देश को है. इसके लिए जरूरी है कि वैक्सीन को पेटेंट मुक्त किया जाएगा. हालांकि कुछ परेशानियां इसमें भी है.

कोविडशील्ड का पेटेंट सरकार के हाथ में नहीं

केंद्र सरकार इस कानून के तहत भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का निर्माण करने के लिए तो दूसरी कंपनियों को कंपलसरी लाइसेंस जारी कर सकती है. लेकिन कोविशील्ड के मामले में ये फैसला प्रभावी नहीं होगा. क्योंकि इस वैक्सीन का पेटेंट ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका कंपनी के पास है.

ऐसा करने वाला पहला देश है भारत 

भारत दुनिया का पहला ऐसा देश है, जिसने कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) से पेटेंट (Patent) हटाने की मांग की. इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को भी प्रस्ताव भेजा, लेकिन अब तक इस पर कोई फैसला नहीं हो सका है. इसके अलावा भारत और दक्षिण अफ्रीका ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में वैक्सीन पेटेंट की छूट के लिए नए सिरे से कोशिश शुरू की है, और अब WTO से उम्मीदें बढ़ गई हैं.

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