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संस्थाओं की अपील: परेशानी में गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर दिया, अब लौटा ही नहीं रहे लोग

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जयपुर11 घंटे पहलेलेखक: प्रमोद कुमार शर्मा

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दोबारा जरूरत ना पड़ जाए, इसलिए लोग सिलेंडर लौटा ही नहीं रहे हैं।

प्लीज आपका मरीज ठीक हाे गया है ताे ऑक्सीजन सिलेंडर लौटा दें, ताकि दूसरे जरूरतमंद काे काम आ सके। जिन संस्थानों और कंपनियों ने काेराेना पीड़िताें की मदद के लिए निशुल्क ऑक्सीजन सिलेंडर दिए थे, वाे सिलेंडर वापस नहीं आने पर लाेगाें काे इस तरह के मैसेज करने काे मजबूर हाे रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक औद्याेगिक संगठन और औद्याेगिक क्षेत्रों में लगी इकाइयों ने मरीजों की मदद के लिए करीब 5,000 ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराए थे।

इसमें से लगभग 80 फीसदी सिलेंडर लाेगाें ने इस आशंका से वापस नहीं लौटाए कि कहीं उनकाे दाेबारा इनकी जरूरत नहीं पड़ जाए। उधर, डॉक्टर मोहित चतुर्वेदी का कहना है कि हाेम आइसोलेशन में इलाज कराने वाले मरीज काे सात से दस दिन ऑक्सीजन लगाने की जरूरत हाेती है। एक मरीज के लिए दिनभर में डी-टाइप तीन सिलेंडर की जरूरत पड़ती है। ऐसे में लाेगाें काे मरीज ठीक हाेने के बाद सिलेंडर लौटा देने चाहिए।

100 सिलेंडर दिए, 4 लाैटाए
फाेर्टी अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने बताया कि संगठन ने काेराेना पीड़िताें की मदद के लिए एक माह पहले 100 सिलेंडर दिए थे। कई बार मैसेज करने पर भी 4 सिलेंडर ही लौटाए गए। दोबारा जरूरत ना पड़ जाए, लोग सिलेंडर लौटा ही नहीं रहे हैं। ऐसे में दूसरे जरूरतमंद लाेगाें की मदद भी नहीं कर पा रहे हैं।

सिलेंडर काे रीफिल कराना भी मुश्किल
किराए पर ऑक्सीजन सिलेंडर देने वाले अजीत साेनी का कहना है कि पिछले चार-पांच दिन से ऑक्सीजन प्लांटों से सिलेंडरों काे रिफिल कराना भी मुश्किल हाे रहा है। लाेग सिलेंडर रिफिल कराने के लिए एक से दूसरे प्लांट में चक्कर लगा रहे हैं। इसके बावजूद मुश्किल से ही सिलेंडर रिफिल हाे पा रहे हैं। इसके चलते हाेम आइसोलेशन मरीजों की जान का खतरा बना हुआ है। काबिलेगौर है कि 15,000 रुपए की सिक्युरिटी राशि लेकर कई लाेग 200 रुपए प्रति दिन के किराए पर ऑक्सीजन सिलेंडर दे रहे हैं।

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