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राजस्थान के 5 दोस्तों का जज्बा: लॉकडाउन में काम बंद हुआ तो कारों को बनाया अस्पताल, जरूरतमंदों को दे रहे मुफ्त ऑक्सीजन

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कोटा10 मिनट पहले

कार में ऑक्सीजन पर मरीज।

कोरोना संक्रमण के दूसरे वेव के बीच अस्पताल ऑक्सीजन बेड, वेंटिलेटर और जरूरी दवाइयों की कमी से जूझ रहे हैं। मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है। इन परिस्थितियों में राजस्थान के 5 युवा अपनी कार में ही ऑक्सीजन लगाकर जरूरतमंदों को मुफ्त सेवा दे रहे हैं। सोमवार को इन कारों में 4 मरीजों को ऑक्सीजन लगाई गई, जबकि 2 के घर पर सिलेंडर पहुंचाया गया।

कोटा के विज्ञाननगर निवासी चंद्रेश गेहिजा (44) का आर्य समाज रोड पर गाड़ियों का सर्विस सेंटर है। चंद्रेश ने साईं मित्र मंडल के अपने 4 दोस्तों आशीष सिंह, भरत समनानी, रवि कुमार और आशु कुमार के साथ मिलकर 3 कारों को मरीजों के लिए अस्पताल का शक्ल दे दिया। ये कारें साईं चौक पर खड़ी रहती हैं, और जरूरतमंदों की सेवा के लिए काम करती हैं।

चंद्रेश ने बताया कि लोगों की तकलीफ देखकर हमने अपनी गाड़ियों को मरीजों की सेवा में लगाया है। कार में ऑक्सीजन सेटअप के लिए हमनें 1100 रुपए के रेगुलेटर 3500 रुपए में खरीदे। ऑक्सीजन मास्क के भी 40 के बजाय 100 रुपए देने पड़े। हर मरीज को अलग-अलग ऑक्सीजन मास्क लगाना पड़ता है। इसका खर्च सभी दोस्त मिलकर उठाते हैं।

ऐसी कारों को इमरजेंसी हॉस्पिटल बना दिया गया है।

चंद्रेश बताते हैं कि ऐसे मरीज जिनको अस्पताल में बेड नहीं मिल रहा। ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं हो रही। उनको यहां मदद दी जा रही है। मरीजों को जरूरत के हिसाब से ऑक्सीजन लगाई जा रही है। दूसरा विकल्प नहीं होने तक मरीज को यहीं रखा जाता है। कई बार इन्हीं गाड़ियों से मरीज को उसके घर या अस्पताल तक पहुंचाया जा रहा है।

कार में लेटा कर लगाई जा रही ऑक्सीजन।

कार में लेटा कर लगाई जा रही ऑक्सीजन।

सभी दोस्त उठा रहे खर्चा
चंद्रेश ने बताया कि फिलहाल 3 कारें लगाई हैं। जरूरत पड़ने पर इनकी संख्या बढ़ाते रहेंगे। इनमें एक कार खुद की, एक भाई की व एक चाचा की कार है। इनमें दो कारों को एंबुलेंस बनाया गया है। सभी गाड़ियों में गैस किट लगवाई है। मरीज के ऑक्सीजन चढ़ने तक कार का एसी चालू रखना पड़ता है। चंद्रेश ने बताया कि ऑक्सीजन सिलेंडर व कारों का मिलाकर प्रतिदिन 5-7 हजार का खर्चा आ रहा है। ये खर्च सभी दोस्त आपस मे मिलकर उठा रहे हैं। कुछ अन्य लोग भी मदद कर रहे हैं।

ऑक्सीजन सिलेंडर व कारों का मिलाकर प्रति दिन 5 से 7 हजार का खर्चा आ रहा है।

ऑक्सीजन सिलेंडर व कारों का मिलाकर प्रति दिन 5 से 7 हजार का खर्चा आ रहा है।

रातभर लाइन में लगने के बाद मिलते हैं 3 सिलेंडर
चंद्रेश ने बताया कि कार में एक सिलेंडर से 3 मरीजों को ऑक्सीजन देने की व्यवस्था है। एक मरीज को दो से 3 घंटे ऑक्सीजन पर रख रहे हैं। अभी बड़ी मुश्किल से जुगाड़ करके 3 सिलेंडर की ही व्यवस्था हो पा रही है। ऑक्सीजन सिलेंडर लेने के लिए शाम 7 बजे लाइन में लगना पड़ता । रात करीब डेढ़ बजे ऑक्सीजन सिलेंडर मिल पाता है। जरूरतमंदों के इतने कॉल आते हैं कि रात को फोन बंद रखना पड़ता है।

कार में एक सिलेंडर से 3 मरीजों को ऑक्सीजन देने की व्यवस्था है

कार में एक सिलेंडर से 3 मरीजों को ऑक्सीजन देने की व्यवस्था है

चंद्रेश ने बताया कि पिछले 10-12 दिनों से मरीजों के घरों तक नि:शुल्क ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचा रहे थे। कई मरीज ऑक्सीजन सिलेंडर रख लेते थे। कुछ जगह तो ऐसी थी जहां तीन-चार मंजिलों पर सिलेंडर चढ़ाना पड़ता था। इसमें समय ज्यादा लग रहा था।

गाड़ी में सिलेंडर रखता युवक।

गाड़ी में सिलेंडर रखता युवक।

कम मरीजों की मदद हो पा रही थी। फिर विचार बदला और कारों में ही ऑक्सीजन लगाने की व्यवस्था की। शुरुआत में परिचित फैक्ट्री मालिक ने 4 ऑक्सीजन के सिलेंडर देकर मदद की।

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