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Friday, May 7, 2021
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राजस्थान के 17 जिलों से ग्राउंड रिपोर्ट: सरकार ने जिन 17 जिलों में 15 दिन के भीतर 970 मौतें गिनाईं; वहां 1895 अंत्येष्टियां कोविड प्रोटोकॉल से, 1378 सामान्य तरीके से हुई


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राजस्थान5 घंटे पहले

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बीकानेर के मुक्तिधाम में पीपीई किट पहनकर कर रहे अंत्येष्टि।

प्रदेश में कोरोना से अब तक साढ़े चार हजार से लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन यह जानकारी भी अधूरी हैं। दैनिक भास्कर ने राजस्थान के जयपुर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर समेत 17 बड़े जिलों में मुक्तिधाम और कब्रिस्तानों का ऑडिट किया तो पता चला कि इन जिलों में पिछले 15 दिन में ही 1895 शवों की अंत्येष्टि की गई। जबकि सरकारी आंकड़ों में इन्हीं 17 जिलों में 15 दिन के अंदर 970 मौतें ही गिनाई गई हैं।

यानी 925 मौतें तो सिर्फ 17 जिलों में छिपाई गई हैं। पूरे 33 जिलों का आंकड़ा जोड़ें तो और भी डरावनी तस्वीर सामने आएगी। कई जिलों में कोरोना से मौतों के मुकाबले काेरोना प्रोटोकॉल के तहत की जाने वाली अंत्येष्टि की संख्या कम है तो कहीं इनमें करीब सौ तक का अंतर है। भीलवाड़ा में कोरोना से 22 मौतें बताई गईं, लेकिन 119 की अंत्येष्टि प्रोटोकॉल के तहत की गई।

डिब्बों में बंद अंतिम सत्य : मुक्तिधाम के लॉकर फुल, पीपों और डिब्बों में रख रहे अस्थियां, एक हजार अस्थियों को मोक्ष का इंतजार

तस्वीर कोटा की है। कोरोना ने जीवन को संकट में तो डाला ही। अब मौत के बाद मुक्ति के लिए भी इंतजार करना पड़ रहा है। अस्थि विसर्जन के लिए परिजन हरिद्वार नहीं जा पा रहे, इसलिए मुक्तिधामों के लॉकर फुल हो गए हैं। जगह नहीं बची तो अब डिब्बाें और पीपों में अस्थियां भरी जा रही हैं। यहां मुक्तिधामों में करीब एक हजार अस्थियां मोक्ष के इंतजार में हैं।

तस्वीर कोटा की है। कोरोना ने जीवन को संकट में तो डाला ही। अब मौत के बाद मुक्ति के लिए भी इंतजार करना पड़ रहा है। अस्थि विसर्जन के लिए परिजन हरिद्वार नहीं जा पा रहे, इसलिए मुक्तिधामों के लॉकर फुल हो गए हैं। जगह नहीं बची तो अब डिब्बाें और पीपों में अस्थियां भरी जा रही हैं। यहां मुक्तिधामों में करीब एक हजार अस्थियां मोक्ष के इंतजार में हैं।

पिता की कोरोना से मौत; परिवार से कोई अंत्येष्टि के लिए तैयार नहीं हुआ तो बेटी अकेले लाई शव

बीकानेर के मरुधरा नगर में रहने वाली 22 साल की रेणु भार्गव अपने पिता का शव एंबुलेंस में लेकर परदेसियों की बगेची मुक्तिधाम पहुंची। उसे अकेले देख श्मशान के व्यवस्थापक भी चौंके। पूछने पर पता चला कि पिता की मौत कोरोना से होने के कारण परिवार का कोई सदस्य साथ नहीं आया। प्रबंधक राजीव गौड़ ने बताया कि बिटिया की आंखें रो-रोकर पथराई हुई थी। श्रमिकों की मदद से शव उतरवाकर कोविड प्रोटोकॉल के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

10 साल से मुक्तिधाम में काम कर रहे मोईन बोले- रोज सूर्यास्त तक चिताएं तैयार कर रहा हूं

कोटा के किशाेरपुरा मुक्तिधाम में माेईनखान बीते 10 वर्षाें से चिताएं तैयार कर रहे हैं। बाेले- मेरा परिवार 40 साल से यह काम कर रहा है। पिछले साल से यहां शवाें की जाे लाइन लगी देखी है, वह मेरे दादा और पिता ने भी नहीं देखी। सुबह 7 बजे से सूर्यास्त तक चिताएं तैयार करता रहता हूं। जाे लाेग काेराेना को हल्के में लेकर गाइडलाइन का मखाैल उड़ा रहे हैं, वे दिनभर यहां रुककर नजारा देख लें। बीते 15 दिन की स्थिति सबसे डरावनी है।

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