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भारतीय अर्थव्यवस्था: स्थानीय लॉकडाउन से जून तक लगेगी 2.8 करोड़ की चपत


एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Tue, 04 May 2021 05:31 AM IST

भारतीय अर्थव्यवस्था
– फोटो : social media

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वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बार्कलेज का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की पटरी से उतरने से बचाने के लिए संक्रमण पर काबू पाना जरूरी है। अगर हालात ऐसे ही भयावह बने रहे और कई राज्यों में भारी स्थानीय लॉकडाउन जून तक लागू रही तो इससे अर्थव्यवस्था को 38.4 अरब डॉलर की चपत लग सकती है।

बार्कलेज ने कहा कि संक्रमण की पहली लहर पर काबू पाने के लिए लगे देशव्यापी लॉकडाउन से मांग और रोजगार पर बुरा असर पड़ा था। दूसरी लहर में महामारी के अधिक निराशावादी परिदृश्य पर अगर शीघ्र नियंत्रण नहीं पाया गया और आवाजाही पर अगस्त तक प्रतिबंध जारी रहा तो वृद्धि दर गिरकर 8.8 फीसदी पर आ सकती है।

वृद्धि दर अनुमान को घटाकर 10 फीसदी किया
बार्कलेज ने चालू वित्त वर्ष के लिए देश के आर्थिक वृद्धि दर अनुमान को 11 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया है। उसके विश्लेषकों ने कहा कि संक्रमण की दर और मरने वालों की तेजी से बढ़ती संख्या के कारण उत्पन्न अनिश्चितता को देखते हुए वृद्धि दर अनुमान में कटौती की गई है। 

टीककरण की धीमी रफ्तार भी सुधार की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। इससे पहले कई एजेंसियां वृद्धि दर अनुमान में कटौती कर चुकी हैं। आरबीआई ने भी कहा कि 2021-22 के दौरान अर्थव्यवस्था 10.5 फीसदी की दर से वृद्धि करेगी।

विस्तार

वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बार्कलेज का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की पटरी से उतरने से बचाने के लिए संक्रमण पर काबू पाना जरूरी है। अगर हालात ऐसे ही भयावह बने रहे और कई राज्यों में भारी स्थानीय लॉकडाउन जून तक लागू रही तो इससे अर्थव्यवस्था को 38.4 अरब डॉलर की चपत लग सकती है।

बार्कलेज ने कहा कि संक्रमण की पहली लहर पर काबू पाने के लिए लगे देशव्यापी लॉकडाउन से मांग और रोजगार पर बुरा असर पड़ा था। दूसरी लहर में महामारी के अधिक निराशावादी परिदृश्य पर अगर शीघ्र नियंत्रण नहीं पाया गया और आवाजाही पर अगस्त तक प्रतिबंध जारी रहा तो वृद्धि दर गिरकर 8.8 फीसदी पर आ सकती है।

वृद्धि दर अनुमान को घटाकर 10 फीसदी किया

बार्कलेज ने चालू वित्त वर्ष के लिए देश के आर्थिक वृद्धि दर अनुमान को 11 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया है। उसके विश्लेषकों ने कहा कि संक्रमण की दर और मरने वालों की तेजी से बढ़ती संख्या के कारण उत्पन्न अनिश्चितता को देखते हुए वृद्धि दर अनुमान में कटौती की गई है। 

टीककरण की धीमी रफ्तार भी सुधार की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। इससे पहले कई एजेंसियां वृद्धि दर अनुमान में कटौती कर चुकी हैं। आरबीआई ने भी कहा कि 2021-22 के दौरान अर्थव्यवस्था 10.5 फीसदी की दर से वृद्धि करेगी।



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